Learn Trading Technical Analysis Series – Day 1: परिचय (Introduction) Hindi

पहले एक छोटी जानकारी —

हम यह 30‑दिन की ब्लॉग‑सीरीज़ खासतौर पर इसलिए ला रहे हैं ताकि आप स्टेप‑बाय‑स्टेप, बिलकुल मुफ्त में Technical Analysis सीख सकें। रोज़ाना सिर्फ 5–10 मिनट निकालकर यह ब्लॉग पढ़ने और बताए गए अभ्यास करने से आप चार्ट पढ़ना, सही एंट्री‑एग्ज़िट ढूँढना और जोखिम नियंत्रित करना सीख जाओगे — चाहे आप Forex, Crypto या Indian Stock Market में ट्रेड कर रहे हों। इसे अपनी रोज़मर्रा की आदत बनाइए; यह आपके ट्रेडिंग करियर के लिए बहुत मददगार साबित होगा。

Technical Analysis आखिर है क्या?

Technical Analysis (TA) वह प्रक्रिया है जिसमें भाव (Price), वॉल्यूम (Volume) और समय (Time) के डेटा से पैटर्न/ट्रेंड पढ़कर भविष्य की संभावनाएँ आँकी जाती हैं। यह किसी कंपनी की बैलेंस शीट नहीं, बल्कि चार्ट पर दिख रहे क्रय‑विक्रय (demand‑supply) के संकेतों पर आधारित होता है।

Note - याद रखें: TA Probability पर चलता है, गैर‑गारंटीड है। सफलता का राज़ सिस्टम + अनुशासन + रिस्क मैनेजमेंट है।
TA के तीन मुख्य स्तंभ
  • Price discounts everything: कीमत में अधिकांश जानकारी समाहित होती है।

  • Prices move in trends: बाजार प्रायः ट्रेंड में चलता है – ऊपर, नीचे, या साइडways।

  • History repeats: पैटर्न/व्यवहार अक्सर दोहराए जाते हैं।

TA कहाँ उपयोगी है?

  • इक्विटी (Cash & F&O)

  • कमोडिटीज/MCX

  • Forex

  • Crypto
    नियम‑कानून का सम्मान करें; यह सामग्री शैक्षणिक है, निवेश सलाह नहीं।

Technical Analysis के मूल तत्व

 

  • चार्ट प्रकार: लाइन, बार, कैंडलस्टिक (सबसे लोकप्रिय)

  • टाइमफ़्रेम: 1‑मिनट/5‑मिनट (इंट्रा‑डे), 1‑घंटा/4‑घंटा (स्विंग), डेली/वीकली (पोज़िशनल/निवेश)

  • Price Action: पैटर्न, स्विंग‑हाई/लो, गैप्स

  • Volume: मूव की ताकत/कमज़ोरी का संकेत

सीरीज़ टीज़र: Day‑2 में कैंडलस्टिक आधार (ओपन‑हाई‑लो‑क्लोज, बुलिश/बेयरिश कैंडल, विक/बॉडी) समझेंगे।

ट्रेंड, सपोर्ट और रेज़िस्टेंस

Important Part of Our Research and Analysis
  • ट्रेंड:

    • अपट्रेंड: हाईयर‑हाई, हाईयर‑लो

    • डाउनट्रेंड: लोअर‑हाई, लोअर‑लो

    • साइडवे: रेंज‑बाउंड

  • ट्रेंडलाइन: कम से कम 2–3 टच‑पॉइंट जोड़कर खींचें, ब्रेक/री‑टेस्ट पर ध्यान दें।

  • सपोर्ट/रेज़िस्टेंस: ऐसे स्तर जहाँ मांग/आपूर्ति उभरती है।

    • पहचान कैसे करें? पिछले स्विंग‑हाई/लो, गैप‑ज़ोन, हाई‑वॉल्यूम कैंडल की बेस, राउंड नंबर।

       
आगे आने वाले अध्याय में हम इस पूरे विषय पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

टाइमफ़्रेम चुनने का सरल तरीका

 

प्रोफ़ाइल सामान्य होल्डिंग मुख्य टाइमफ़्रेम कन्फर्मेशन
इंट्रा‑डे मिनट/घंटे 5m, 15m 1h/Day
स्विंग दिन–सप्ताह 1h, 4h Day/Week
पोज़िशनल/निवेश सप्ताह–माह Day, Week Week/Month

टॉप‑डाउन एनालिसिस अपनाएँ: Week → Day → 4h/1h → 15m → 5m।

इंडिकेटर्स (जैसे मूविंग एवरेज, RSI, MACD) सहायक हैं, निर्णायक नहीं।
पहले Price Action, फिर इंडिकेटर से पुष्टि।

रिस्क मैनेजमेंट – जीत का असली मंत्र

रिस्क मैनेजमेंट ट्रेडिंग का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।
चाहे आप कोई भी रणनीति (Strategy) सीख लें, कितनी भी महारत हासिल कर लें, लेकिन यदि आपका रिस्क मैनेजमेंट और ट्रेडिंग साइकोलॉजी सही नहीं है, तो आप कभी एक सफल ट्रेडर नहीं बन पाएंगे।

यदि आप अपनी भावनाओं पर नियंत्रण नहीं रख पाते, अनुशासन का पालन नहीं कर पाते, या जोखिम को सही तरीके से प्रबंधित नहीं कर पाते, तो बेहतर होगा कि आप इस मार्केट से फिलहाल दूरी बनाएँ। गलत रिस्क मैनेजमेंट लंबे समय तक ट्रेडिंग को टिकाऊ नहीं रहने देता।
  • पोज़िशन साइजिंग: प्रति ट्रेड जोखिम ≤ 1–2% पूँजी का।

  • स्टॉप‑लॉस: टेक्निकल स्तर पर तय करें; भावनात्मक SL से बचें।

  • रिस्क:रिवार्ड ≥ 1:2 पर फोकस।

  • डायवर्सिफिकेशन & कोरिलेशन समझें।

  • ट्रेड जर्नल लिखें: एंट्री/एग्ज़िट वजह, भावनाएँ, परिणाम।

ट्रेडिंग साइकोलॉजी – सिस्टम से भी ज़्यादा ज़रूरी

  • ओवरट्रेडिंग से बचें, FOMO नियंत्रित करें।

  • प्लान के बिना ट्रेड नहीं।

  • हार/लॉस को स्वीकारना सीखें; दीर्घकाल दृष्टि रखें।

अनुपालन व नैतिकता (Compliance & Ethics)

  • यह श्रृंखला शैक्षणिक उद्देश्य से है; किसी प्रकार की व्यक्तिगत निवेश सलाह नहीं

  • किसी भी buy/sell recommendation को सार्वजनिक रूप से साझा करने से पहले संबंधित नियमों/पंजीकरण (जैसे Research Analyst) को समझें।

  • पारदर्शिता: स्व‑हित/होल्डिंग्स घोषित करें (यदि कभी चर्चा आए)।

Disclaimer: बाजार जोखिमों के अधीन। पूँजी लगाने से पहले अपनी शोध करें या पंजीकृत विशेषज्ञ से सलाह लें।

इस सीरीज़ का रोडमैप (30‑Day Plan)

Day‑1: परिचय – TA की बुनियाद, स्तंभ, टाइमफ़्रेम, जोखिम
Day‑2: कैंडलस्टिक बेसिक्स – OHLC, बुलिश/बेयरिश, विक‑बॉडी
Day‑3: 10 मुख्य कैंडल पैटर्न – Hammer, Engulfing, Doji…
Day‑4: ट्रेंड की पहचान – HH/HL, LH/LL, स्ट्रक्चर शिफ्ट
Day‑5: सपोर्ट/रेज़िस्टेंस उन्नत – ज़ोन, स्विंग, गैप, राउंड‑नंबर्स
Day‑6: चार्ट पैटर्न्स‑1 – डबल टॉप/बॉटम, फ्लैग, पेनेंट
Day‑7: चार्ट पैटर्न्स‑2 – हेड‑एंड‑शोल्डर्स, ट्रायंगल्स
Day‑8: मूविंग एवरेज – SMA/EMA, क्रॉसओवर, ट्रेंड फ़िल्टर
Day‑9: RSI डीप‑डाइव – ओवरबॉट/ओवरसोल्ड से आगे, डाइवर्जेन्स
Day‑10: MACD – मोमेंटम और ट्रेंड का मेल
Day‑11: वॉल्यूम एनालिसिस – वॉल्यूम स्पाइक, OBV की समझ
Day‑12: मल्टी‑टाइमफ़्रेम एनालिसिस – टॉप‑डाउन अप्रोच
Day‑13: ब्रेकआउट‑ब्रेकडाउन – फॉल्स ब्रेकआउट से बचाव
Day‑14: सप्लाई‑डिमांड ज़ोन्स – अवधारणा और प्रैक्टिस
Day‑15: एंट्री‑एग्ज़िट नियम – चेकलिस्ट बनाना
Day‑16: रिस्क मैनेजमेंट‑1 – पोज़िशन साइजिंग
Day‑17: रिस्क मैनेजमेंट‑2 – R:R, ट्रेलिंग SL, पोर्टफोलियो रिस्क
Day‑18: ट्रेडिंग साइकोलॉजी‑1 – भावनाएँ, अनुशासन
Day‑19: ट्रेडिंग साइकोलॉजी‑2 – जर्नलिंग, पुनरावलोकन
Day‑20: इंट्रा‑डे सिस्टम का खाका – नियम‑आधारित सेटअप
Day‑21: स्विंग‑ट्रेडिंग सिस्टम – स्विंग संरचना
Day‑22: पोज़िशनल/निवेश दृष्टिकोण – वीकली/मंथली चार्ट
Day‑23: इंडिकेटर्स का संयोजन – कंफ्लुएंस बनाना
Day‑24: इवेंट‑ड्रिवन मूव्स – न्यूज/रिज़ल्ट/मैक्रो
Day‑25: बैकटेस्टिंग का आधार – क्या, क्यों, कैसे
Day‑26: ट्रेड मैनेजमेंट – स्केल‑इन/आउट, ATR‑आधारित SL
Day‑27: गलतियाँ और सीख – 20 सामान्य त्रुटियाँ
Day‑28: टूलकिट – चार्टिंग/डेटा/जर्नल टेम्पलेट
Day‑29: केस‑स्टडी – 3 वास्तविक चार्ट, चरणबद्ध विश्लेषण
Day‑30: समापन – पूरी सीरीज़ का पुनरावलोकन, क्विज़

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